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प्राकृतिक विकिरण: हमारे चारों ओर अदृश्य ऊर्जा (Natural Radiation: Energy That is Always Around Us )

जब हम radiation शब्द सुनते हैं, तो आमतौर पर nuclear reactors, X-rays या atomic accidents हमारे दिमाग में आते हैं। लेकिन वास्तव में natural radiation हमारे चारों ओर हर समय मौजूद रहती है। यह पृथ्वी के बनने के समय से ही environment का हिस्सा रही है और हवा, मिट्टी, पानी, भोजन तथा हमारे शरीर के भीतर भी पाई जाती है। इसलिए radiation केवल मानव-निर्मित तकनीकों से जुड़ी चीज़ नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का भी एक अभिन्न भाग है।


Natural radiation मुख्य रूप से तीन स्रोतों से आती है—cosmic, terrestrial और internal radiation। Cosmic radiation outer space से आती है, जहाँ सूर्य और अन्य खगोलीय पिंड high-energy particles emit करते हैं जो पृथ्वी के atmosphere से टकराते हैं। Terrestrial radiation मिट्टी, चट्टानों और building materials में मौजूद uranium, thorium और potassium जैसे radioactive elements से उत्पन्न होती है। Internal radiation तब होती है जब हम भोजन, पानी या साँस के माध्यम से कुछ radioactive पदार्थ अपने शरीर में ले लेते हैं। Radon gas, जो uranium के decay से बनती है, indoor spaces में जमा होकर स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती है।

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Radiation exposure को समझने और सुरक्षित सीमाएँ तय करने के लिए उसका measurement बहुत ज़रूरी है। इसके लिए Becquerel, Gray और Sievert जैसी units का उपयोग किया जाता है। Becquerel radioactivity की मात्रा बताता है, Gray absorbed energy को दर्शाता है और Sievert मानव शरीर पर radiation के biological effect को ध्यान में रखता है। ये units doctors, scientists और safety agencies को यह तय करने में मदद करती हैं कि radiation का स्तर सुरक्षित है या नहीं।


Radiation exposure को measure करने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। Thermo-Luminescent Dosimeter (TLD) और OSL dosimeter समय के साथ मिली radiation dose को मापते हैं। Geiger–Muller counter radiation की मौजूदगी को तुरंत detect करता है, जबकि gamma-ray spectrometry environment में मौजूद radioactive isotopes की पहचान करने में मदद करती है। Radon monitoring विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि radon gas के लंबे समय तक संपर्क में रहने से lung cancer का खतरा बढ़ जाता है।

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Natural radiation का लगातार संपर्क कुछ health risks पैदा कर सकता है, खासकर जब exposure लंबे समय तक हो। इनमें lung cancer, genetic mutations, tissue damage और immune system की कमजोरी शामिल हैं। हालाँकि सामान्य background radiation आमतौर पर low level की होती है, फिर भी इसकी नियमित निगरानी और सही management आवश्यक है ताकि संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।


Radiation safety के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ जैसे ICRP, IAEA और UNSCEAR guidelines और standards निर्धारित करती हैं। World Health Organization indoor radon levels को सीमित रखने की सलाह देता है, जबकि विभिन्न देश अपने-अपने regulatory frameworks के अनुसार occupational और public exposure limits तय करते हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि natural radiation से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को कोई गंभीर नुकसान न हो।

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Natural radiation केवल मानव स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और ecosystems को भी प्रभावित करती है। मिट्टी और पानी में मौजूद radiation plants और animals पर असर डाल सकती है। Chernobyl और Fukushima जैसे उदाहरणों से यह समझ में आया है कि radiation के long-term effects प्रकृति में दिखाई दे सकते हैं। वहीं, कुछ high-radiation areas में जीवों का adaptation भी देखा गया है, जो वैज्ञानिक शोध का एक महत्वपूर्ण विषय है।


भविष्य में बेहतर detectors, real-time monitoring, artificial intelligence और data analysis जैसी तकनीकें natural radiation risk assessment को और अधिक सटीक बनाएँगी। साथ ही, students और आम जनता के बीच awareness बढ़ाना बहुत ज़रूरी है ताकि radiation को डर के रूप में नहीं, बल्कि एक scientific phenomenon के रूप में समझा जा सके।


Natural radiation जीवन का एक unavoidable हिस्सा है। इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन सही ज्ञान, वैज्ञानिक निगरानी और public awareness के माध्यम से इसके जोखिमों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। Science, policy और society के सहयोग से ही हम प्राकृतिक विकिरण के साथ एक सुरक्षित और संतुलित सह-अस्तित्व सुनिश्चित कर सकते हैं।


प्राकृतिक विकिरण से हम बच नहीं सकते, लेकिन समझकर, मापकर और सही तरीके से प्रबंधित करके, हम इसे अपने जीवन के लिए सुरक्षित बना सकते हैं। ज्ञान ही सबसे बड़ा संरक्षण है।


For further details:


B. P. Singh

Ex-Chairman

(Experimental Nuclear Physicist)

Department of Physics

AMU ALIGARH

 
 
 

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