नाभिकीय ऊर्जा में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के साथ आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ी छलांग...
- bpsinghamu
- 1 day ago
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भारत की ऊर्जा यात्रा में नाभिकीय ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नाभिकीय ऊर्जा संयंत्रों में ऊर्जा परमाणु नाभिक के विखंडन से प्राप्त होती है। जब किसी भारी परमाणु का परमाणु नाभिक टूटता है, तो बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है और साथ-साथ कुछ न्यूट्रॉन भी निकलते हैं। ये न्यूट्रॉन आगे अन्य परमाणु नाभिकों का विखंडन करते हैं और इस प्रकार एक सतत श्रृंखलाबद्ध प्रक्रिया चलती रहती है, जिसे श्रृंखला अभिक्रिया कहा जाता है।
उदाहरण के रूप में, जब यूरेनियम-२३५ के एक परमाणु नाभिक का विखंडन होता है, तो लगभग २०० मेगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा अत्यंत विशाल मानी जाती है, क्योंकि पदार्थ की बहुत छोटी मात्रा से भी इतनी अधिक ऊर्जा प्राप्त होना विज्ञान की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है। यही कारण है कि नाभिकीय ऊर्जा को भविष्य की शक्तिशाली और दीर्घकालिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
इसी वैज्ञानिक सिद्धांत को सुरक्षित और नियंत्रित रूप में उपयोग करने के लिए नाभिकीय रिएक्टर बनाए जाते हैं। भारत का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर Prototype Fast Breeder Reactor तमिलनाडु राज्य के कल्पक्कम में स्थापित है, जो देश के दक्षिणी भाग में चेन्नई के निकट स्थित है। इसे “प्रोटोटाइप” अर्थात नमूना रिएक्टर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से विकसित भारत का पहला उन्नत ब्रीडर रिएक्टर है, जो भविष्य में बनने वाले अनेक रिएक्टरों के लिए आधार और मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

इस रिएक्टर में मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्लूटोनियम-२३९ और यूरेनियम-२३८ का मिश्रण होता है। यहाँ तेज न्यूट्रॉन की सहायता से विखंडन की प्रक्रिया चलती है। विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉन ऊर्जा पैदा करने के साथ-साथ नए ईंधन का निर्माण भी करते हैं। इसी कारण इसे ब्रीडर रिएक्टर कहा जाता है, क्योंकि यह उपयोग किए गए ईंधन से अधिक नया ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। वर्तमान समय में इस रिएक्टर में थोरियम का प्रत्यक्ष उपयोग ईंधन के रूप में नहीं किया जा रहा है, किंतु भारत की दीर्घकालिक योजना में थोरियम आधारित ऊर्जा प्रणाली की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
रिएक्टर के संचालन में एक महत्वपूर्ण अवस्था होती है जिसे क्रिटिकलिटी कहा जाता है। सरल शब्दों में, क्रिटिकलिटी वह स्थिति है जब जितने परमाणु नाभिक टूटते हैं, उतने ही नए विखंडन लगातार होते रहते हैं, जिससे अभिक्रिया संतुलित, नियंत्रित और सुरक्षित रूप से चलती रहती है तथा स्थिर ऊर्जा उत्पादन संभव होता है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर माननीय प्रधानमंत्री ने देश के नाभिकीय वैज्ञानिकों और अभियंताओं को हार्दिक बधाई दी है और इसे भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक क्षमता तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया है। यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब विश्व के कई हिस्सों में नाभिकीय ऊर्जा के विनाशकारी उपयोग को लेकर चिंताएँ दिखाई देती हैं। ऐसे वातावरण में भारत ने पुनः यह स्पष्ट किया है कि वह नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों, सतत विकास और विकसित भारत के निर्माण के लिए ही प्रतिबद्ध है।
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर नाभिकीय रिएक्टर की यह सफलता आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत की ओर बढ़ते राष्ट्र की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक छलांग है।
यह सफलता पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। भारतीय नाभिकीय भौतिकी संघ (आईएनपीए) की ओर से हम सभी नाभिकीय वैज्ञानिकों, अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को इस महान उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद देते हैं। उनके अथक परिश्रम, समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टि ने न केवल देश को नई ऊर्जा दिशा दी है, बल्कि युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया है।

Professor B. P. Singh is an experimental nuclear physicist, former Chairperson, and presently a Senior Professor in the Department of Physics, Aligarh Muslim University, Aligarh, Uttar Pradesh, India.



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